टाइटेनिक के ये रहस्य देख कर आंखें खुली की खुली रह जाएंगी। secret of titanic

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दोस्तों टाइटेनिक सिप अपने समय का सबसे बड़ा जहाज था। शिप का पूरा नाम रॉयल मैनशिप टाइटेनिक यानी कि आरएमएस टाइटेनिक था। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया था। जिसमें 2224 लोग यात्रा कर सकते थे। इसको बनाने का जिम्मा व्हाइट स्टार लाइन कंपनी को दिया गया था। जो कि एक ब्रिटिश शिपिंग कंपनी थी। और इससे लगभग 3000 वर्कर की टीम ने मिलकर तैयार किया था। और इसे बनाने में 9 मजदूरों की जान भी चली गई थी। 40 वर्कर गंभीर रूप से घायल हुए थे। उसको बनाने में लगभग ₹480000000 का खर्च आया था। जो कि उस समय के हिसाब से काफी ज्यादा था। दोस्तों यह जहाज 10 मंजिला जहाज था। यह अपने आप में अटलांटिक में बसा एक छोटे से शहर की तरह लगता था। इसकी सबसे खास बात यह थी। कि यह दुनिया का सबसे तेज चलने वाला जहाज था। और इसमें जो सीटी लगी थी। उसे 15 किलोमीटर दूर तक सुना जा सकता था।

 Titanic Hestry

सीप को बनाने वाली कंपनी का तो यह भी दावा था। कि यह कभी ना डूबने वाला जहाज है। लेकिन किसको पता था। कि टाइटेनिक जैसा विशाल जहाज कभी पानी में डूब सकता है। ऐसे में यह सवाल तो सभी के मन में आया होगा। कि आखिर ऐसा क्या हुआ। कि दुनिया का सबसे मजबूत जहाज पानी में डूब गया। आइए जानते हैं। दोस्तों टाइटैनिक के बनने में 3 साल का समय लगा था। और टाइटेनिक बनाने में उस समय सबसे महंगी एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था। 1 अप्रैल 1912 को शिप समुद्र में एक्सपेरिमेंट के लिए छोड़ दिया गया ।
इसके बाद टाइटैनिक ने अपने एक्सपेरिमेंट में बेलफास्ट से आयरिश रिवर तक समुद्र में 150 किलोमीटर की स्पीड से सफलता किया।

और उस वक्त में कंपनी के कई बड़े बड़े अधिकारी मौजूद थे। जिसके बाद उसी दिन शाम को 7:00 बजे टाइटेनिक बेलफास्ट वापस लौट आया। और एक्सपेरिमेंट फॉर सक्सेसफुल माना गया। मैं आपको यह भी बता दूं। कि एक्सपेरिमेंट सक्सेसफुल हो। जाने के बाद 2 अप्रैल 1912 को टाइटेनिक को यात्रा के लिए ऑफिशल लॉन्च कर दिया गया। टाइटेनिक 2 अपनी पहली यात्रा से पहले ही ज्यादा पॉपुलर हो चुका था। क्योंकि उस समय टाइटैनिक का मुकाबला कोई और जहाज कर ही नहीं सकता था

Titanic

टाइटेनिक में एक तीन प्रकार के क्लास के रूम मौजूद थे। यात्रा करने के लिए फर्स्ट क्लास का टिकट 270000 का सेकंड क्लास का टिकट 100000थर्ड क्लास का टिकट 20000 का था। इसके अलावा टाइटेनिक में यात्रियों की सुविधाओं का ख्याल रखा गया था।
इसकी पहली यात्रा इंग्लैंड पैन के साउथहैंपटन से लेकर अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी तक तय की जानी थी। और इसके कैप्टन एडवर्ड जॉन्स विद थे। वह दिन था। 10 अप्रैल 1912 का और समय था। रात के 12:00 बजे का जब टाइटैनिक अपने 2200 यात्रियों को लेकर रवाना हुआ इस जहाज में कई अमीर लोग मौजूद थे। और उस समय का सबसे अमीर व्यक्ति जय का वस्त्र भी शिफ्ट में मौजूद था। दोस्तों इस ऐप में कई लोग तो ऐसे थे। जो सिर्फ अपने शौक के लिए सिर्फ को कर रहे थे। और शायद उनको यह नहीं मालूम था। कि जिस जहाज में वह सवार हुए हैं वह कभी अपनी मंजिल तक पहुंच ही नहीं पाएगा। अब टाइटेनिक काफी आगे निकल चुका था। समुद्र में चारों तरफ तेज हवा चल रही थी। जिसके कारण मौसम में हल्की सी ठंडक भी थी। इसी समय के फर्स्ट ऑफिसर ने टाइटैनिक की स्पीड को बढ़ाने का आदेश दे दिया। ताकि टाइटेनिक टाइम से पहले अमेरिका पहुंचकर यात्रियों और मीडिया को हैरान कर दे टाइटेनिक शाम की रोशनी में आगे बढ़ रहा था।

इस जहाज को सफर में निकले हुए लगभग 3 दिन हो चुके थे। और टाइटेनिक में अभी तक एक दुर्घटना भी हो चुकी थी। दरअसल टाइटेनिक फिल्म निचले हिस्से में आग लग चुकी थी। टाइटैनिक के निकलते हैं। पहले दिन से ही लगी थी। परंतु उस शिप के अधिकारियों ने इसकी भनक उसमें सवार किसी भी यात्री को नहीं दी। क्योंकि टाइटेनिक के सारी टिकट पहले से बिक चुके थे। और इस घटना की जानकारी देनी थी। उनको यात्रा को वहीं पर स्थगित करना पड़ जाता। जिससे कंपनी को भारी नुकसान झेलना पड़ता। इसलिए उस घटना को नजरअंदाज करते हुए। टाइटेनिक आगे बढ़ाते रहें। आप बात करते हैं। यात्रा के पांचवे दिन की गाइड अटलांटिक महासागर में तेजी से बढ़ रहा था। और दिन था। रविवार का 14 अप्रैल की रात का समुद्र में काफी शांति थी। पर आसमान में चांद भी मौजूद नहीं था। चांद ना होने के कारण आसमान में घना अंधेरा छाया हुआ था। और इसके कारण शिप के कैप्टन को सामने का कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। वैसे मैं आपको यह भी बता दूं। कि जहाज के वरफ के टिले में टकराने से पहले शिप के कैप्टन को छह संकेत पहले ही आ चुके थे।

पर उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया था। रास्ते में कई बड़े बर्फ के टुकड़े मौजूद हैं। जिससे शिव कभी भी टकरा सकता है। मगर क्या तुम क्या तुम को यह मालूम नहीं था। कि टाइटेनिक किसी आइसबर्ग से टकरा जाएगा। उस रात ऐसा ही हुआ। कि को घना अंधेरा होने की वजह से सामने का इस पर दिखाई ही नहीं दिया। और कुछ देर के बाद रात को तकरीबन 11:40 पर जहाज के छठे ऑफिसर के नोट के टेलीफोन की घंटी बजी। जिस पर ऑफिसर को यह बताया गया। कि रास्ते में एक बड़ा बर्फ का टीला भी है। जिससे उनको बच के रहना है ।

उसके बाद इस बात की जानकारी कैप्टन को भी दी गई। लेकिन तब तक देर हो चुका था। कैप्टन को जब तक क्या जानकारी मिली तब मात्र 30 सेकंड का समय शेष था। उस वक्त जहाज के सभी कर्मचारी सतर्क हो गए थे। पर जहाज के स्पीड के कारण उनकी एक न चली और जहाज जा करके उस बर्फ के टीले से टकरा गई। जहाज का वह हिस्सा बर्फ टिले से टकरा है। जिस हिस्से में पहले से आग लग चुकी थी। जिसके कारण सारे मेटल कमजोर हो चुके थे। और फिर उस काली रात के साए में पूरे टाइटैनिक को अपने शिकस्त में ले लिया। इसमें कितने लोगों की जानें गई। कितने रुपयों का नुकसान हुआ। आज तक अंदाजा नहीं लगाया जा सका। इसे दुनिया भर के सबसे बड़े दुर्घटना में गिना जाता है। उम्मीद है। कि आप को टाइटेनिक की यह कहानी काफी दिलचस्प लगी होगी । मिलते हैं। फिर किसी नए कहानी में किसी नए सफर पर।

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